Monday, July 19, 2010

A Tribute to Dr.Pratibha Diwan


श्रीमती प्रतिभा दीवान की प्रथम पुण्य तिथि २४ सितम्बर २०१० पर श्रद्धांजलि
(शशि दुबे के अनुरोथ पर श्रीमती सविता दुबे,संबलपुर(उड़ीसा) द्वारा लिखित )



आज तुम्हारी प्रथम पुण्य तिथि पर हम तुम्हे शत शत श्रधांजलि अर्पित करते हैं|

न भूलेंगे तुम्हारे साये का झोंका,
प्रतिदिन प्रतिपल याद आओगे सदा|
ठहर जाये साँस तुम्हारे हर मुस्कान पर,
अश्रुपूरित श्रधांजलि अर्पण करते रहेंगे सदा|
तुमको भूले नहीं बीत गए साल,
याद आते रहे बार-बार|

श्रीमती प्रतिभा दीवान का जन्म उड़ीसा प्रान्त के संबलपुर जिला के ग्राम बलंदा में ३१ अक्टूबर १९४१ को हुआ था | इनके पिता श्री कैलाश दुबे थे| इनके पिता जी का देहांत बहुत जल्दी हो गया था,उस समय प्रतिभा पांचवी कक्षा में पढ़ती थीं | प्रतिभा के दो भाई हैं |एक जगदीश दुबे जो मेकनिकल इंजिनीयर तथा दूसरा यतीन्द्र दुबे ऍम एस सी (भौतिक शास्त्र ) हैं | इनकी माता श्रीमती जयंती दुबे ने अपने तीने बच्चों का लालन पालन बहुत अच्छी तरह किया | बच्चों को इसका आभास तक नहीं होने दिया कि उनके पिता नहीं हैं| उनकी उम्र अभी ९६ वर्ष है|
प्रतिभा तीसरी कक्षा तक की पढाई ग्राम बलंडा में की थी |चौथी कक्षा में वो संबलपुर आ गयी ||चौथी कक्षा से मेट्रिक तक(X) की पढाई संबलपुर के लेडी लुईस गर्ल्स हाई स्कूल (सरकारी स्कूल ) से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की | गंगाधर मेंहेर कॉलेज से सन १९६३ में बी एस सी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की | तत्पश्चात वे ऍम.एस.सी.(गणित ) करनेके लिए इलाहबाद गयीं| सन १९६५ में इलाहबाद विश्वविद्ययालय से ऍम.एस.सी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की|
उसी वर्ष सन १९६५ में इनकी शादी महासमुंद (बेलटुकरी वाले ) दीवान परिवार के डा प्रेमशंकर दीवान से हुई| उस समय वे सागर विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र के प्रोफेसर थे| शादी के बाद प्रतिभा सागर विश्वविद्यालय से प़ी.एच.ड़ी (PHD) की उपाधि प्राप्त की| उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था|| उनका एक लड़का और एक लड़की है | लड़का डा प्रभात दीवान रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में (NIT Raipur ) में भूगर्भ शास्त्र के H.O.D. हैं | इनके पति प्रेमशंकर दीवान भौतिक शास्त्र के H.O.D. पद से पदोनिव्रित्त हो कर तुमगांव स्थान में स्थित हैं |

प्रतिभा रिश्ते में मेरी चचेरी ननद थीं | उनका मुझसे आधिक लगाव था यह कहना ठीक नहीं है, उनका तो हमारे पारिवार के सभी सदस्यों से आधिक लागाव था | उनका नाम प्रतिभा , जो उन्होंने साकार कर दिखाया | वह ममतामयी ,स्नेहमयी ,साभी गुणों से संपन ,छोटे बड़ों सभी को चाहती ,सदा अनुशाषित थीं | वो लाखों में एक थी | सभी के प्रति उनके मन में सामान भाव था | वो एक सांस्कृतिक संस्कारी व परम्परावादी महिला थीं | वो शिक्षित हो कर भी अपने हर रीति रिवाजों को मानती थीं | कभी भी अवहेलना नहीं किया करती थीं |उनके बारे में जितना भी कहा जाए बहुत कम है | मेरे पास उनके लिए लिए शब्द नहीं हैं परन्तु उनके प्रति मेरे मन में जो भावनाएं हैं वह हामेशा मन -मस्तिष्क पर एक प्रेरणा श्रोत की तरह रहेगा जिस से मैं अपने को अलग नहीं कर सकती | अंत में मैं इतना कहना चाहूंगी |

तुम छोड़ चले जाते जग का बंधन
तुम हुए अनंत में लीन
हम रहे बिना जल मीन
तुम रहोगे सदा हमारे दिलों में
स्वीकारो ये श्रद्धा सुमन |



Every person who came in contact with her was influenced by her deep mesmerizing caring nature.Kindly share your thoughts by adding comments.

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